पाठ्यक्रम: जीएस-2/ शासन
चर्चा में क्यों?
- उच्चतम न्यायालय ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 को चुनौती देने वाली केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के सेवारत अधिकारियों द्वारा दायर याचिकाओं पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है।
अधिनियम की पृष्ठभूमि
- केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक/अधिनियम वर्ष 2025 के उच्चतम न्यायालय के एक निर्णय के अनुपालन में लाया गया था, जिसमें न्यायालय ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) में महानिरीक्षक (आईजी) तक के पदों पर भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को दो वर्षों के भीतर चरणबद्ध रूप से समाप्त करने का निर्देश दिया था।
- न्यायालय ने सीएपीएफ के ग्रुप ‘ए’ अधिकारियों को संगठित ग्रुप ‘ए’ सेवाएँ (ओजीएएस) भी घोषित किया, जिससे उन्हें भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) तथा भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) की तरह सुव्यवस्थित संवर्ग, स्पष्ट पदोन्नति तथा कैरियर प्रगति प्राप्त हो सके।
- अक्टूबर 2025 में गृह मंत्रालय द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका भी खारिज कर दी गई।
- इसके बावजूद गृह मंत्रालय ने न्यायालय के निर्णय की उपेक्षा करते हुए आईजी तथा उप महानिरीक्षक (डीआईजी) के पदों पर आईपीएस अधिकारियों की नियुक्ति जारी रखी, जिसके परिणामस्वरूप सेवानिवृत्त सीएपीएफ अधिकारियों ने केंद्रीय गृह सचिव के विरुद्ध अवमानना याचिका दायर की।
क्या आप जानते हैं?
- गृह मंत्रालय (एमएचए), सीएपीएफ तथा आईपीएस दोनों का संवर्ग-नियंत्रण प्राधिकरण है।
- भर्ती संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा की जाती है।
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) की संरचना:
- सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ): पाकिस्तान एवं बांग्लादेश सीमा पर तैनात।
- केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ): हवाई अड्डों तथा महत्त्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा करता है।
- केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ): आंतरिक सुरक्षा, कानून-व्यवस्था बनाए रखने तथा वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में तैनात।
- सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी): नेपाल एवं भूटान सीमा की सुरक्षा करता है।
- भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी): चीन सीमा पर तैनात।
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026
- इसका उद्देश्य केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में सहायक कमांडेंट से लेकर महानिदेशक (डीजी) तक के ग्रुप ‘ए’ (राजपत्रित) अधिकारियों की भर्ती, पदोन्नति, प्रतिनियुक्ति तथा सेवा शर्तों के लिए एक समान विधिक ढाँचा स्थापित करना है।
- यह गृह मंत्रालय को इन विषयों पर नियम बनाने का अधिकार देता है, जो किसी भी असंगत कानून, नियम, न्यायालय के निर्णय अथवा प्रशासनिक आदेश पर प्रभावी होंगे।
- इसका उद्देश्य विधिक स्पष्टता प्रदान करना, सीएपीएफ की विशिष्ट परिचालन पहचान बनाए रखना तथा न्यायिक निर्देशों को प्रशासनिक एवं संघीय आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना है।
यह आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को भी विधिक रूप से स्थापित करता है, जिसके अनुसार:
- आईजी के 50% पद,
- अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) के कम-से-कम 67% पद, तथा
- विशेष महानिदेशक (विशेष डीजी) और महानिदेशक (डीजी) के सभी पद
- आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति से भरे जाएँगे।
आलोचना
- कैरियर में ठहराव: सीएपीएफ संवर्ग के अधिकारियों का कहना है कि वरिष्ठ पदों पर आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति के कारण उनकी पदोन्नति अवरुद्ध हो रही है।
- उदाहरण के लिए, सीआरपीएफ के सहायक कमांडेंटों को अक्सर 16 वर्ष से अधिक समय तक पदोन्नति नहीं मिलती, जबकि आईपीएस अधिकारियों को इसी अवधि में कई पदोन्नतियाँ प्राप्त हो जाती हैं।
- परिचालन संबंधी बोझ: सीएपीएफ अधिकारियों का कहना है कि उग्रवाद-रोधी अभियानों का वास्तविक नेतृत्व वही करते हैं और सर्वाधिक हताहत भी वही होते हैं, जबकि आईपीएस अधिकारी प्रायः महानिरीक्षक (आईजी) या उससे ऊपर के स्तर पर प्रतिनियुक्ति पर आते हैं तथा सीधे मैदानी अभियानों में भाग नहीं लेते।
- उन्होंने पदोन्नति की सीमित संभावनाओं के कारण सीएपीएफ अधिकारियों में बढ़ती आत्महत्याओं तथा स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति पर भी चिंता व्यक्त की है।
- गैर-कार्यात्मक पदोन्नयन (एनएफयू): सीएपीएफ अधिकारियों का कहना है कि वर्ष 2006 में केंद्रीय ग्रुप ‘ए’ सेवाओं के लिए शुरू की गई यह सुविधा उन्हें पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं कराई गई है।
- वेतन संबंधी असमानता: सीएपीएफ अधिकारियों को अन्य केंद्रीय ग्रुप ‘ए’ सेवाओं की तुलना में वेतन एवं भत्तों के मामले में नुकसान उठाना पड़ता है।
- न्यायिक शक्ति में कमी: आलोचकों के अनुसार केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 न्यायपालिका की शक्ति को कम करता है तथा सीएपीएफ कर्मियों की सेवाओं की उपेक्षा करता है।
- उनका कहना है कि यह अधिनियम सीएपीएफ के शीर्ष नेतृत्व में आईपीएस के प्रभुत्व को बनाए रखकर उच्चतम न्यायालय के निर्णय को प्रभावहीन बना देता है।
सरकार का पक्ष
- सरकार का कहना है कि सीएपीएफ राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कार्य राज्य सरकारों के साथ निकट समन्वय में करते हैं, इसलिए केंद्र–राज्य संबंधों को प्रभावी बनाए रखने के लिए आईपीएस अधिकारियों की भूमिका आवश्यक है।
- वर्तमान में पाँचों केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल अलग-अलग सेवा नियमों से संचालित होते हैं। यह अधिनियम उनके कार्मिकों से संबंधित मामलों के लिए एक समान विधिक व्यवस्था स्थापित करने का प्रयास करता है।
- सरकार के अनुसार यह अधिनियम भारत की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करेगा तथा सीएपीएफ, राज्य पुलिस और राज्य सरकारों के बीच समन्वय को बेहतर बनाएगा।
निष्कर्ष एवं आगे की राह
- केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 का उद्देश्य विधिक एकरूपता स्थापित करना तथा आंतरिक सुरक्षा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाना है।
- हालाँकि, इसे आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति के कारण प्रभावित हो रहे सीएपीएफ अधिकारियों के कैरियर विकास एवं मनोबल के साथ संतुलित करना आवश्यक है।
- इसके लिए वरिष्ठ पदों पर सीएपीएफ संवर्ग का अधिक प्रतिनिधित्व, प्रतिनियुक्त अधिकारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण, पारदर्शी पदोन्नति समय-सीमा तथा सभी हितधारकों से व्यापक परामर्श सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि परिचालन दक्षता और निष्पक्षता दोनों बनी रहें।
स्रोत: TH